Doguli Umeed

 

 

Life-hope-reality

Kehtey hai Ummeed pe Duniya kaayam Hai…

Yehi Umeed Saason ko Chalati Hai…

Umeed Na ho toh khoon ka dauraa rukaa saa lagtaa hai

Lagta hai jaisey sirf saasein chal rahi hai…..Nabaz nahin…

Umeed Ek ekhsaas hai jo sehlaata hai dil ko

Jaisey Mishri si ghuli ho is Umeed main

Jo meetha karti hai iske her ehsaas ko

Jaisey february ke mahiney mein chamkati si dhoop ka mazaa ho…

Kuch vaisi hi is Umeed ki chamak hai…

Jo jalaati nahin…sukoonn deti hai…

Per jab yehi umeed tootney lagti hai…

Toh woh mishri si mithaas kadvi lagti hai

Sunheri dhup…jaaddoon  ki thand si lagti hai

Sukun nahin Sajaa lagti hai….

Kyun yeh Umeed Doguli hai?

Kyun Yeh umeed Doguli hai?

Advertisements

सपनो के पंख

purple

हर दिन की तरह आज भी जागी जब में नींद से…

मिले हिस्से उस् पंख के जो मेरे सपनो के थे…

तकिये के नीचे हिफासत से रखे थे किसी ने…

सिर्फ़ मेरे लिए…सिर्फ़ मेरे लिए…

हर दिन कि तरह आज भी जोड़ा उन्हे पहले के मिले हिस्सों से…

पर कुछ ख़ास था आज कि सुभह में…

हर दिन कि तरह नहीं…यह दिन कुछ ख़ास था..

मेरे सपनों के पंख का आख्री हिस्सा भी मेरे पास था…

अब उड सकती थी मैं अप्ने सपनों कि और…

हर पल लगता अब ख़ास था…

हर हिस्सा सालों से थाम के रखा था…

इस्सि उम्मीद पे कि एक दिन यह पंख पूरे हो जयेंगे आज वोह दिन आ ही गया…

आज वोह दिन आ ही गया…

तोह हैरान ही रह गयी सोच के…

कि पंख तोह जोड लिये पर…

सपने तोह देखे ही नहीं…सपने तो सँजोये ही नहीं

किस काम के है अब यह सपनों के पंख??

जो फिजूल में ही जोडे मैने इतने सालों तक

संजोती कुछ सपने तो आज फुर्र से उड़ती उनकी और…

फिर सोचा कि… मलमल के कपड़े में संभाल के रख दू इन्हे

कि एक दिन सपने संजोकर उनको पेहेन लूँगी और उड़ूँगी दूर तलक…

अपने सपनों के पंखो को पहेन कर…