सपनो के पंख

purple

हर दिन की तरह आज भी जागी जब में नींद से…

मिले हिस्से उस् पंख के जो मेरे सपनो के थे…

तकिये के नीचे हिफासत से रखे थे किसी ने…

सिर्फ़ मेरे लिए…सिर्फ़ मेरे लिए…

हर दिन कि तरह आज भी जोड़ा उन्हे पहले के मिले हिस्सों से…

पर कुछ ख़ास था आज कि सुभह में…

हर दिन कि तरह नहीं…यह दिन कुछ ख़ास था..

मेरे सपनों के पंख का आख्री हिस्सा भी मेरे पास था…

अब उड सकती थी मैं अप्ने सपनों कि और…

हर पल लगता अब ख़ास था…

हर हिस्सा सालों से थाम के रखा था…

इस्सि उम्मीद पे कि एक दिन यह पंख पूरे हो जयेंगे आज वोह दिन आ ही गया…

आज वोह दिन आ ही गया…

तोह हैरान ही रह गयी सोच के…

कि पंख तोह जोड लिये पर…

सपने तोह देखे ही नहीं…सपने तो सँजोये ही नहीं

किस काम के है अब यह सपनों के पंख??

जो फिजूल में ही जोडे मैने इतने सालों तक

संजोती कुछ सपने तो आज फुर्र से उड़ती उनकी और…

फिर सोचा कि… मलमल के कपड़े में संभाल के रख दू इन्हे

कि एक दिन सपने संजोकर उनको पेहेन लूँगी और उड़ूँगी दूर तलक…

अपने सपनों के पंखो को पहेन कर…

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One thought on “सपनो के पंख

  1. @Harjeet: Touche! We all work so hard towards completing our dreams that we forget to dream itself. And when the time comes to fulfill those dreams, it is often too late..connected..

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